Wednesday, 27 September 2017

दिल की बीमारी से बचने के लिये क्या करें

रेशेदार सब्जियों खाये ताकि दिल रहे तन्दरूस्त 
निकाली गई जागरूकता रैली 
दमोह | 27-सितम्बर-2017
 
   भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित, अनियमित जीवनशैली एवं आहार के चलते भारत में हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. बजाज ने बताया कि दिल की बीमारी से संबंधित लक्षणों एवं संतुलित पौष्टिक आहार एवं व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाने लोगों को जागरूक करने, सामाजिक-सचेतता लाने के उद्देश्य से जन-जागरूकता रैली निकाली गई। रैली को हरी झण्डी दिखाकर डॉ. आर.के. बजाज ने रवाना किया। रैली में बी.सी.एम. एवं शहरी आषा कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई।
   इस दौरान जिला क्षय एवं कुष्ठ अधिकारी डॉ. गिरीश जैन, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तुलसा ठाकुर, जिला विस्तार एवं माध्यम अधिकारी सहित स्वास्थ्य अमला मौजूद रहा। रैली घण्टा घर चैक, एवरेस्ट लॉज से गुजरते हुए अम्बेडकर चौक होते हुए नवीन क्षय भवन में आयोजित संवाद बैठक में परिणित हुई।
दिल की बीमारी से जुड़े लक्षण
   रैली दौरान डॉ. बजाज ने बताया कि दिल की बीमारी के बारे में समय रहते अगर पता चल जाये तो इसका ईलाज संभव है। हमारे खान-पान का दिल की सेहत से बहुत घनिष्ट संबंध है। छाती में बाएं और तेज दर्द और दर्द का बाह तक जाना, सांस लेने में तकलीफ होना। जरा से परिश्रम से सांस फूलना, दिल की धड़कनें तेज और बढ़ी हुई होना तथा अत्याधिक पसीना, बिना किसी कारण के थकान महसूस होना इत्यादि दिल की बीमारियों से जुड़े लक्षणों को दर्शाते है।
   उन्होंने कहा दिल को दुरूस्त रखने में दैनिक दिनचर्या में कसरत को स्थान देना काफी कारगर उपाय है। खान-पान व वसायुक्त खाने को नियंत्रित रखकर आहार में पर्याप्त मात्रा में रेशेदार चीजे, हरि सब्जियां, सलाद और फल लेना फायदेमंद होता है। अधिक चिकनाई वाला खान-पान, तले हुए पकवान, फास्टफूड का सेवन ज्यादा करने और मदिरा का सेवन करते रहने से हमारे खून में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाती है, जो रक्त संचार प्रणाली के लिए नुकसान देह होती है। फलस्वरूप दिल का दौरा पड़ने की शिकायत उभरती है।
दिल की बीमारी से बचने के लिये क्या करें
   एन.सी.डी. नोडल अधिकारी डॉ. प्रहलाद पटैल ने नवीन क्षय भवन में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मौजूद शहरी आशा कार्यकर्ताओं को ‘‘क्या खाये ताकि की दिल रहे तन्दरूस्त’’ पर जागरूक किया। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. ममता तिमोरी एवं डॉ. गिरीश जैन जिला कुष्ठ अधिकारी विशेष रूप से मौजूद रहे। डॉ. पटैल ने बताया कि हल्का सुपाच्य संतुलित भोजन का सेवन करें। शारीरिक मेहनत करें। 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी स्त्री/पुरूष नियमित रूप से रक्त में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा की जांच तथा कम से कम साल में एक बार सम्पूर्ण शरीर का स्वास्थ्य परीक्षण अवष्यक कराये। सेहत के प्रति लापरवाही न बरते। वजन, रक्तचाप को सामान्य बनाये रखे। नियमित रूप से प्रातः खुली हवा में घूमने जाना अपनी दिनचर्चा में शामिल करें। अधिक तेलीय भोज्य पदार्थों से परहेज करें।
   डॉ. पटैल ने बताया कि हृदय की मांसपेशियों को नियमित रूप से कार्य करने के लिये ऑक्सीजनयुक्त रक्त की सतत् आवश्यकता होती है। जब रक्त की आपूर्ति बाधित होती है तो इसकी कमी या अभाव में हृदय की मांसपेशियों क्षतिग्रस्त हो जाती है। इस स्थिति को हृदयघात या हार्ट अटैक के रूप में जाना जाता है।

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