गेहूं की फसल कम से कम लगायें, चना, मसूर, राई की फसल को प्राथमिकता दें। इनके बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। इन फसलों में पानी भी कम लगता है। उक्त फसलें एक पानी देने पर तैयार हो जाती है। आग्रह है कि आप सभी अपने क्षेत्रों में किसानों को इन फसलों को लेने के लिए प्रेरित करें। यह बात आज कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में कही। उन्होंने कहा जलाशयों जहां पर पानी है, किसानों के मांग पत्र पर सिंचाई की अनुमति दी जायेगी। साथ ही यह भी कहा गया कि किसानों को सिंचाई के लिए अस्थाई पम्प कनेक्शन देने विद्युत विभाग जल संसाधन विभाग की एनओसी आवश्यक रूप से लेंगा। कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने जल उपभोक्ता संस्थाओं के पदाधिकारियों से कहा सिंचाई की मांग आने पर विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाही की जायेगी। उन्होंने बैठक में मौजूद सचिव-कार्यपालन यंत्री, जिला जल उपयोगिता समिति, जल संसाधन विभाग आर.सी. तिवारी से कहा जलाशय से सिंचाई की मांग आवेदन प्राप्त होने पर त्वरित कार्रवाही सुनिश्चित की जायें। कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि जल उपलब्धता के आधार पर अनुमति दी जायेगी परंतु रिजर्व वाटर से पानी लेने पर संबंधित किसानों के विरूद्ध कार्रवाही की जायेगी।

कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारियों से कहा कि विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन हो रहा है, किसानों को चना, मसूर, राई अलसी आदि फसलों को लेने के लिए प्रेरित किया जायें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के जलाशयों में कम वर्षा होने के कारण पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध नहीं है। बैठक में मौजूद उप संचालक कृषि ने कहा कि अभी तोरिया, सरसों लगाई जा सकती है, इसके अलावा मटर, मसूर, अलसी, सरसों के बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा किसान भाई बीज नगद में प्राप्त कर लें। अनुदान उनके खातों में जमा हो जायेगा। सचिव-कार्यपालन यंत्री, जिला जल उपयोगिता समिति जल संसाधन विभाग आर.सी. तिवारी ने बताया वर्ष 2017-18 में जलाशयों एवं स्टापडेम-बैराज में कुल भराव क्षमता 20037 मि.घ.मी उपलब्ध थी, परंतु इस वर्ष समस्त परियोजना में 11,582 मि.घ.मीटर उपलब्ध जल की मात्रा के अनुसार 26,962 हैक्टर क्षेत्र में रबी सिंचाई का लक्ष्य प्रस्तुत किया। जिसका बैठक में अनुमोदन किया गया। इसके अनुसार पलैवा 28 योजनाएं, पलैवा धन एक पानी 65 योजनाएं, पलैवा धन दो पानी 18 योजनाएं। इस प्रकार 111 योजनाओं के माध्यम से 26,962 हैक्टर क्षेत्र में सिंचाई होगी और शेष 32 योजनाओं में नहीं होगी। श्री तिवारी ने यह भी बताया कि उपलब्ध 115.82 मि.घ.मीटर जल में से जिन जलाशयों में जल भराव 25 प्रतिशत या इससे कम है, उनका जल निस्तार एवं पेयजल के लिए आरक्षित रखा गया है, का बैठक में अनुमोदन किया गया। बैठक में जल की उपलब्धता के आधार पर फसल चयन पर जोर दिया गया। बैठक में कार्यपालन यंत्री पंचमनगर परियोजना श्री वर्मा ने कहा कि पगरा जलाशय में पर्याप्त पानी है, तीन सिंचाई के लिए पानी दिया जायेगा, इससे कैरबना, बम्होरीलड़ई और खेराखेरी, मुराज, धरिया, रौंसरा जलाशयों को पानी दिया जायेगा। कलेक्टर ने दमोह नगरपालिका अघिकारी से कहा कि राजनगर जलाशय में जुझारघाट से पर्याप्त मात्रा में जल भण्डारित कर लें। बैठक में जिले के जिले के जल उपभोक्ता संस्थाओं के पदाधिकारी संबंधित विभागों के अधिकारी मॉजूद थे।
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