Sunday, 24 September 2017

महिला शिक्षिका अथवा स्टाफ स्कूल वाहन में रहना आवश्यक-कलेक्टर डॉ. शर्मा
शासकीय, अशासकीय शालाओं के बच्चों की सुरक्षा के
संबंध में दिशा निर्देश जारी
दमोह : 24 सितम्बर 2017
      राज्य शासन द्वारा शासकीय, अशासकीय शालाओं के बच्चों की सुरक्षा के संबंध में समय-समय पर दिशा निर्देश जारी किये जाते है। जिनकी समीक्षा किया जाना आवश्यक है। हरियाणा के एक स्कूल में दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है, जिसमें विद्यालय के एक मासूम छात्र की उसी विद्यालय के एक बस कण्डक्टर द्वारा नृशंस हत्या कर दी गई। इस संबंध में शासकीय, अशासकीय शालाओं में  व्यवस्थाएं सुनिश्चित किया जाने के निर्देश जारी किये गये हैं।
      कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने समस्त माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शालाओं मान्यता नियम 2017 के नियम 18 के अंतर्गत प्रत्येक शाला की मान्यता प्राप्त करने के लिए समस्त शैक्षणिक तथा अशैक्षणिक टीचिंग एण्ड नॉन टींचिंग स्टाफ से यह शपथ प्राप्त करना अनिवार्य है कि उनके विरूद्ध लैगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 (THE PROTECTION OF CHILDREN OFFENCES ACT 2012)  तथा किशोर न्याय बालकों की देखरेख तथा संरक्षण, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट अधिनियम 2000 के अंतर्गत कोई मामला दर्ज नहीं है।
      शाखा की स्कूल बसों में महिला कण्डक्टर की उपलब्धता अनिवार्य है। संचालनालय द्वारा भी निर्देश दिये गये है कि यदि महिला कण्डक्टर उपलब्ध न हों तो बच्चों को घर से लायें तथा वापस घर छोड़ते हुए अंतिम छात्र तक कम से कम एक महिला शिक्षिका अथवा स्टाफ स्कूल वाहन में रहना आवश्यक है।
      मान्यता नियम 2017 के नियम 5(20) अन्य शर्ते (6) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त करने वाली समस्त शालाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वाहन के लिए सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है। मान्यता के लिए आवेदन करते समय उसे रजिस्ट्रीकृत वाहनों की सूची लगाना अनिवार्य है।
      सभी अशासकीय शालाओं विशेषकर जो सीबीएसई से संबंद्ध है, उनके समस्त शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक स्टाफ जिनमें बस ड्राइवर कण्डक्टर, माली, चौकीदार आदि सम्मिलित है, उनके पुलिस सत्यापन करायें जायें। सभी शालाओं में आउठ सोर्सिंग के आधार पर रखें जाने वाले कर्मचारियों के भी चरित्र सत्यापन करायें जायें।
      मान्यता अनुसार सभी शालाओं में पार्टटाईम काउन्सलर रखे जाने के निर्देश दिये है। शिक्षकों एवं पालकों से यह अपेक्षा की गई है कि वह विद्यार्थियों के नियमित व्यवहार में यदि किसी प्रकार का परिवर्तन दिखाई देता है, जैसे कि अचानक से उनका पढ़ाई, लिखाई में मन न लगना, उसका गुमसुम रहना, साथियों के साथ खेलना बंद कर देना आदि तो ऐसी दशा में उसके ऐसे व्यवहार को परस्पर पालक, शिक्षक के ध्यान में लाना तथा बच्चे की काउन्सलिंग करना आवश्यक है।
      बच्चों को स्कूल ले जाने वाली बसों, वेन तथा शालाओं में आवश्यक समस्त स्थानों पर सीसी टीव्ही कैमरा लगाये जायें। प्रत्येक विद्यालय में शिकयत पेटी रखी जायें, जिसमें अभिभावक अथवा विद्यार्थी अपनी शिकायत लिखकर डाल सकें। शाला प्राचार्य द्वारा प्रति दिन शिकायत पेटी को खोला जाकर यदि कोई शिकायत हो तो, उसके निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाही की जायें। स्कूलों की बाथरूम तथा खिड़कियों में आवश्यक दरवाजे तथा जालियों लगी हो। प्रत्येक स्कूल में चौकीदार की आवश्यक व्यवस्थाएं हो।
सुप्रीम कोर्ट में स्कूलों को बसों के बारे में निम्नानुसार दिशा निर्देश दिये है।
      कलेक्टर डॉ. शर्मा ने निर्देशित किया है कि स्कूली बसों के आगे-पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए, स्कूलों बसों में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की व्यवस्था के साथ प्रत्येक बसों में आग बुझाने के उपकरण आवश्यक है, अगर किसी एजेन्सी से बस अनुबंध पर ली गई है तो उस पर ऑन स्कूल ड¬ूटी लिखी होनी चाहिए, बसों में सीट क्षमता से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए, प्रत्येक स्कूल बस में हॉरिजेंटल ग्रिल लगे हों, स्कूल बस पीले रंग की हो जिसके बीच में नीले रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम और फोन नम्बर होना चाहिए, बसों के दरवाजें को अंदर से बंद करने की व्यवस्था होनी चाहिए, बस में सीटों के नीचे बैग रखने की व्यवस्था होनी चाहिए, बसों में टीचर जरूर होने चाहिए जो बच्चों पर नजर रखें, प्रत्येक बस चालक को कम से कम 5 साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए, किसी भी ड्रायवर तथा कंडक्टर को रखने से पहले उसका सत्यापन जरूर करवायें, चालक का कोई चालान नहीं होना चाहिए और न ही उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज होना चाहिए।
      मान्यता नियम  9 (7) के अंतर्गत यदि निरीक्षण के दौरान यदि यह पाया जाता है कि स्कूल प्रबंधन मान्यता संबंधी किन्ही प्रावधानों का पालन नहीं कर रहा है तो मान्यता नियम 11 के अंतर्गत विहित प्रक्रिया का पालन करते हुए संभागीय संयुक्त संचालक उसकी मान्यता निरस्त कर सकेंगे।
      विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए शाला प्रबंधन द्वारा इन सभी बिन्दुओं के अलावा अतिरिक्त अन्य कई व्यवस्थाएं की जा सकती है, वही हमें यह भी ध्यान में रखना होगा, कि स्कूली बच्चों के विरूद्ध इस प्रकार के अपराध स्कूलों में एवं उनके घरों के आसपास हो रहे हैं, उसमें कहीं न कहीं समाज की गिरती हुई मूल व्यवस्था बड़े स्तर पर जिम्मेदार है। इन समस्याओं के निराकरण के लिए हमें समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों के माध्यम से निरंतर रूप से परिवार प्रबोधन की आवश्यकता है। विभाग द्वारा शाला पाठ¬क्रम में सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों को पुष्ट करने के लिए पाठ¬ पुस्तकों को सम्मिलित किया है। नैतिक एवं चारित्रिक शिक्षा के लिए स्कूलो में बाल सभाओं के माध्यम से निरंतर प्रयास किये जा रहे है। पालक शिक्षा संघ तथा शिक्षकों के पालकों से उनके घर जाकर निरंतर सम्पर्क करने से इस प्रकार की घटनाओं की संभावनाएं निश्चित रूप से कम होगी।
      उन्होने सभी मैदानी अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे नियमित रूप से शालाओं के अपने भ्रमण में उपयुक्त अनुसार व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करें तथा अपने भ्रमण प्रतिवेदन में कार्रवाही पालन के संबंध में जानकारी अंकित की जायें।

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