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| अस्थिबाधित दिव्यांग श्री वर्मा अब नही किसी पर आश्रित "सफलता की कहानी" |
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जहां एक ओर इन योजनाओं की जानकारी से जीवन जीने का उनका हौंसला बढा, वही दूसरी ओर शासन की योजनाओं के माध्यम से उन्हें अपना जीवन साथी मिला। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अन्तर्गत इस दिव्यांग दम्पत्ति को 25 हजार रूपये एवं निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना अन्तर्गत एक लाख रूपये की राशि से लाभान्वित किया गया। जीवन जीने के हौंसले, जीवन साथी का सहयोग और शासन द्वारा उपलब्ध कराई गयी सहायता राशि ने मुकेश के जीवन को आत्मनिर्भर बनाने की की दिशा में मार्ग प्रशस्त किया। इन दोनों योजनाओं से मिली सहायता राशि से मुकेश ने खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग से वित्तीय सहायता प्राप्त कर अपने लिए एक ऑटो रिक्शा फायनेंस कराया। आज दिव्यांग मुकेश स्वयं का ऑटो चलाकर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। इतना ही नही बचत की राशि से अपनी दिव्यांग पत्नि को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए मनिहारी की दुकान का व्यवसाय कराने की योजना बना रहे हैं। श्री मुकेश कहते हैं दिव्यांगजनों के लिए शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं ने उनके जीवन को खुशियों से भर दिया है। दिव्यांग होने के बावजूद दूसरों पर आश्रित होने के वजाए दूसरों को आश्रय देने का अनुभव अपने आप में अद्वितीय है। अपनी इस फसलता के लिए शासन की ओर आभार प्रकट करते हुए उन्होंने अन्य दिव्यांगजनों को भी इन योजनाओं से लाभान्वित कराने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया है। |
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