दमोह से महेंद्र दुबे
कैंसर से पीड़ित पांच साल के मासूम की कहानी जो रुला देगी आप सबको - सरकारी मशीनरी की नादिरशाही से जूझ रहा एक मासूम - पूंछ रहा है कब आएंगे अच्छे दिन
दमोह / अब हम आपको जो कड़वी हकीकत बताने जा रहे है वो आपको झकझोर देगी जिसे जानने के बाद आपकी आँखे नम होंगी और दिल दहल जाएगा लेकिन उसके बाद आप सिस्टम को जरूर कोसेंगे / जी हाँ सिस्टम को कटघरे में खड़ा करने के साथ आप भी ये सवाल करेंगे की अच्छे दिन कब आएंगे /
एक पिता की रुंधी हुई आवाज में कुछ यही सवाल कर रहा है रहनुमाओं से पूंछ रहा है की आखिर उसके अच्छे दिन कब आएंगे . आखिर वो क्यों ना पूंछे उसका पूंछना लाज़मी है , लाज़मी इसलिए क्योंकि सूबे और देश की सरकारों ने उसे सब्जबाग दिखाए थे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही रही /
कुछ ऐसा ही इस पिता का पांच साल का मासूम भी सवाल करता है उसे नहीं मालूम की ब्लड कैंसर क्या है , इस बीमारी से क्या होता है और इसका इलाज क्या है लेकिन महीनों से घर और बाहर ये सब सुनते सुनते उसे ये पता चल गया है की वो जिस वजहसे अस्पतालों में जाता है वो बीमारी ब्लड कैंसर है और उसे उससे मुक्ति चाहिए और आखिर में वो ये भी कह देता है है की उसे जीना है / दरअसल ये पांच साल का मासूम दमोह जिले के हटा में ककराई वार्ड में रहने वाला भविष्य सेन है / बीते दो साल पहले डाक्टरों ने इसे बाल्ड कैंसर की बीमारी होना बताया / भविष्य का पिता मनोज हटा में ही एक गुमटी में सेलून चलाता है / रोजाना सो से दो सो रूपये कमाता है , बमुशिकल परिवार चल पाता था लेकिन बेटे को हुई कैंसर की बीमारी ने सब गड़बड़ कर दिया / कच्चा सा मकान गिरवी चला गया तो पत्नी के जेवर भी बेंचने पड़े बावजूद इसके बेटे की बीमारी ठीक नहीं हुई / मनोज ने अपनी हैसियत से ज्यादा खर्च करने के बाद भोपाल और जबलपुर में अपने बेटे का इलाज कराया और जो भी उसके पास था वो जमा पूँजी खर्च कर दी यहाँ तक की भीख मांग कर तक गुजरा कर लिया लेकिन जहाँ से उसकी मदद होनी चाहिए थी वहां से कोई मदद नसीब नहीं हुई / और अब अपने बेटे की जिंदगी बचाने मनोज भटक रहा है और आँखों में आंसू लिए मदद की गुहार लगा रहा है /
अपने जिगर के टुकड़े को इस गंभीर बीमारी से जूझते देख भविष्य की माँ बबली के पास रोने के अलावा कोई चारा नहीं है / वो दिन रात बेटे के कल को लेकर आंसू बहाती है और गरीबी और लाचारी के सामने अपनी किस्मत को कोसने के अलावा और कुछ नहीं कर पाती लेकिन जहाँ उसे उम्मीद की किरण दिखाई देती है बस वो इतना कहती है की उसकी मदद कीजिये ताकि उसका बेटा जी सके दुनिया में रह सके / इस पूरे घटनक्रम में सुखद पहलु ये है की यहाँ लोग जरूर इस मासूम की जिंदगी बचाने के लिए आगे आये है / हटा के हिन्दू और मुस्लिम संगठनों ने एक साथ सामने आकर सड़क पर झोली फैलाकर लोगों से मदद मांगी तो छोटी सी बस्ती में पचास हजार से ज्यादा रकम जमा कर मनोज को सौंपी की वो बच्चे का बंद हो गया इलाज फिर शुरू कराए /
ये पूरा मामला सिस्टम के सामने बौने पड़ते गरीब की कहानी का मामला है / मनोज की माने तो पिछले दो सालों में वो कई बार जिम्मेदार लोगों से मिलने के साथ जिले के कलेक्टर के सामने गुहार लगा चुका है / नेताओं के सामने गिड़गिड़ा चुका है लेकिन किसी ने एक मासूम की जिंदगी बचाने की पहल नहीं की और आखिरकार एक मासूम महज गरीबी की वजह से जिंदगी की जंग हारने की कगार पर है / इस पूरे मामले में जब इलाके के एस डी एम् सी पी पटेल को जानकारी दी गई तो उनकी आत्मा भी काँप गई / चूंकि ये अफसर कुछ दिन पहले ही यहाँ आये है लिहाजा उन्हें इस मासूम के बारे में जानकारी है थी लेकिन अब जब जानकारी मिली तो वो खुद कह रहे है की इसे एक अभियान के रूप में लिया जाएगा और पीड़ित की हर संभव मदद भी होगी
बहरहाल इस मासूम की अपील और उसके पिता के रुंधे गले से निकलने वाले शब्दों को जो भी सुनता है वो हिल जाता है / लाज़मी है लोगों का अंदर तक हिल जाना लेकिन सवाल हमारे सिस्टम पर भी है जब प्रदेश में मुख्यमंत्री की मंशा साफ़ है की गरीबी की वजह से कोई मौत ना हो , इलाज के लिए सरकार कई योजनाए चला रही है और बच्चों के नाम पर सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है उसके बाद आखिर भविष्य जैसे गरीब पीड़ित बच्चों को लाभ क्यों नहीं मिल पाता ? क्या इस तरह के मामलों में दोषी सरकारी तंत्र को सरकार के रहनुमा दण्डित नहीं करेंगे और सबसे बड़ा सवाल की इस खबर को देखने के बाद मुख्यम्नत्री और उसकी सरकार क्या मासूम भविष्य का भविष्य बेहतर बनाने कोई कदम उठाएगी /
महेंद्र दुबे दमोह
कैंसर से पीड़ित पांच साल के मासूम की कहानी जो रुला देगी आप सबको - सरकारी मशीनरी की नादिरशाही से जूझ रहा एक मासूम - पूंछ रहा है कब आएंगे अच्छे दिन
दमोह / अब हम आपको जो कड़वी हकीकत बताने जा रहे है वो आपको झकझोर देगी जिसे जानने के बाद आपकी आँखे नम होंगी और दिल दहल जाएगा लेकिन उसके बाद आप सिस्टम को जरूर कोसेंगे / जी हाँ सिस्टम को कटघरे में खड़ा करने के साथ आप भी ये सवाल करेंगे की अच्छे दिन कब आएंगे /
एक पिता की रुंधी हुई आवाज में कुछ यही सवाल कर रहा है रहनुमाओं से पूंछ रहा है की आखिर उसके अच्छे दिन कब आएंगे . आखिर वो क्यों ना पूंछे उसका पूंछना लाज़मी है , लाज़मी इसलिए क्योंकि सूबे और देश की सरकारों ने उसे सब्जबाग दिखाए थे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही रही /
कुछ ऐसा ही इस पिता का पांच साल का मासूम भी सवाल करता है उसे नहीं मालूम की ब्लड कैंसर क्या है , इस बीमारी से क्या होता है और इसका इलाज क्या है लेकिन महीनों से घर और बाहर ये सब सुनते सुनते उसे ये पता चल गया है की वो जिस वजहसे अस्पतालों में जाता है वो बीमारी ब्लड कैंसर है और उसे उससे मुक्ति चाहिए और आखिर में वो ये भी कह देता है है की उसे जीना है / दरअसल ये पांच साल का मासूम दमोह जिले के हटा में ककराई वार्ड में रहने वाला भविष्य सेन है / बीते दो साल पहले डाक्टरों ने इसे बाल्ड कैंसर की बीमारी होना बताया / भविष्य का पिता मनोज हटा में ही एक गुमटी में सेलून चलाता है / रोजाना सो से दो सो रूपये कमाता है , बमुशिकल परिवार चल पाता था लेकिन बेटे को हुई कैंसर की बीमारी ने सब गड़बड़ कर दिया / कच्चा सा मकान गिरवी चला गया तो पत्नी के जेवर भी बेंचने पड़े बावजूद इसके बेटे की बीमारी ठीक नहीं हुई / मनोज ने अपनी हैसियत से ज्यादा खर्च करने के बाद भोपाल और जबलपुर में अपने बेटे का इलाज कराया और जो भी उसके पास था वो जमा पूँजी खर्च कर दी यहाँ तक की भीख मांग कर तक गुजरा कर लिया लेकिन जहाँ से उसकी मदद होनी चाहिए थी वहां से कोई मदद नसीब नहीं हुई / और अब अपने बेटे की जिंदगी बचाने मनोज भटक रहा है और आँखों में आंसू लिए मदद की गुहार लगा रहा है /
अपने जिगर के टुकड़े को इस गंभीर बीमारी से जूझते देख भविष्य की माँ बबली के पास रोने के अलावा कोई चारा नहीं है / वो दिन रात बेटे के कल को लेकर आंसू बहाती है और गरीबी और लाचारी के सामने अपनी किस्मत को कोसने के अलावा और कुछ नहीं कर पाती लेकिन जहाँ उसे उम्मीद की किरण दिखाई देती है बस वो इतना कहती है की उसकी मदद कीजिये ताकि उसका बेटा जी सके दुनिया में रह सके / इस पूरे घटनक्रम में सुखद पहलु ये है की यहाँ लोग जरूर इस मासूम की जिंदगी बचाने के लिए आगे आये है / हटा के हिन्दू और मुस्लिम संगठनों ने एक साथ सामने आकर सड़क पर झोली फैलाकर लोगों से मदद मांगी तो छोटी सी बस्ती में पचास हजार से ज्यादा रकम जमा कर मनोज को सौंपी की वो बच्चे का बंद हो गया इलाज फिर शुरू कराए /
ये पूरा मामला सिस्टम के सामने बौने पड़ते गरीब की कहानी का मामला है / मनोज की माने तो पिछले दो सालों में वो कई बार जिम्मेदार लोगों से मिलने के साथ जिले के कलेक्टर के सामने गुहार लगा चुका है / नेताओं के सामने गिड़गिड़ा चुका है लेकिन किसी ने एक मासूम की जिंदगी बचाने की पहल नहीं की और आखिरकार एक मासूम महज गरीबी की वजह से जिंदगी की जंग हारने की कगार पर है / इस पूरे मामले में जब इलाके के एस डी एम् सी पी पटेल को जानकारी दी गई तो उनकी आत्मा भी काँप गई / चूंकि ये अफसर कुछ दिन पहले ही यहाँ आये है लिहाजा उन्हें इस मासूम के बारे में जानकारी है थी लेकिन अब जब जानकारी मिली तो वो खुद कह रहे है की इसे एक अभियान के रूप में लिया जाएगा और पीड़ित की हर संभव मदद भी होगी
बहरहाल इस मासूम की अपील और उसके पिता के रुंधे गले से निकलने वाले शब्दों को जो भी सुनता है वो हिल जाता है / लाज़मी है लोगों का अंदर तक हिल जाना लेकिन सवाल हमारे सिस्टम पर भी है जब प्रदेश में मुख्यमंत्री की मंशा साफ़ है की गरीबी की वजह से कोई मौत ना हो , इलाज के लिए सरकार कई योजनाए चला रही है और बच्चों के नाम पर सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है उसके बाद आखिर भविष्य जैसे गरीब पीड़ित बच्चों को लाभ क्यों नहीं मिल पाता ? क्या इस तरह के मामलों में दोषी सरकारी तंत्र को सरकार के रहनुमा दण्डित नहीं करेंगे और सबसे बड़ा सवाल की इस खबर को देखने के बाद मुख्यम्नत्री और उसकी सरकार क्या मासूम भविष्य का भविष्य बेहतर बनाने कोई कदम उठाएगी /
महेंद्र दुबे दमोह

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