यूसुफ पठान @मड़ियादो
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लगातार हो रही पेड़ों की कटाई रोकने में विभाग नाकाम
भास्कर संवाददाता| मड़ियादो मड़ियादो -हटा वन परिक्षेत्र एवं पन्ना टाइगर रिजर्व के मड़ियादो बफर जोन में बहुतायत में पाए जाने वाले फलदार वृक्ष धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। इन पेड़ों की कटाई को लेकर विभाग के पास अब तक कोई प्लान नहीं तैयार किया है। बुजुर्गों का कहना है कि पिछले लगभग दस वर्षों में जंगलों से इमारती लकड़ी का सफाया होने के बाद अब फलदार पेड़ों को भी काटा जा रहा है। नतीजतन वनोपज से आजीविका चलाने वाले लोग परेशान हैं। ग्रामीणों की माने तो यदि इसी तरह जंगलों से फलदार पेड़ों की कटाई जारी रही तो वह दिन दूर नहीं जब फलदार पेड़ों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। बुजुर्ग रामलाल आदिवासी ने बताया कि जंगलों से लगे गांवों के लिए यह फलदार पेड़ ग्रामीणों की जीवन रेखा थे। इन्हीं के सहारे जिले के कई गांवों के ग्रामीण अपनी रोजी-रोटी चलाते थे जंगलों में बहुतायत मात्रा में पाए जाने वाले वेल, आंवला, आचार, महुआ, हर्रा, बहेड़ा आदी के पेड़ अब बहुत ही कम बचे हैं। लगातार इमारती लकड़ी की कटाई के साथ फलदार पेड़ों को भी नहीं छोड़ा गया, जिससे वनोपज पर आश्रित कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट बन गया है। खैर वृक्ष समाप्त, खेरूआ जाती के लोग बनाते थे कत्था: अंचल में एक जाति का नाम अपने काम के कारण खेरूआ पड़ा गया। इस जाति के लोग बर्षों पहले जंगलों में डेरा डाल कर खैर के पेड़ों को काट कर उसे कत्था तैयार करते थे। कत्था को वह लोग अपनी भाषा में खैर कहते हैं। खैर बनाने वाली जाति को आज भी क्षेत्र में खेरूआ नाम से जाना जाता है। हालांकि यह अवैध कार्य था, समय के साथ खैर वृक्ष की अंधाधुंध कटाई और कत्था निर्माण में रोक के नहीं लगने से यहां के जंगलों से खैर वृक्ष की जाति लगभग समाप्त होने की कगार पर है। | ||
यह प्रजातियां खतरे में जंगलों में कुछ समय पहले तक चिरोंजी, आम, तेंदू, महुआ, आंवला, वेल, बहेड़ा सहित अन्य फलदार वृक्ष बड़ी संख्या में हुआ करते थे, लेकिन लगातार पेड़ों की कटाई से पेड़ों का सफाया हो चुका है। हालांकि तेंदू और महुआ अभी शेष हैं। ब्रजमोहन आदिवासी का कहना है जंगलों में एक दशक पहने तक आय के बहुत स्रोत हुआ करते थे। जंगलों से बेल फल, गोंद, बहेड़ा, चिरोंजी के अलावा महुआ और तेंदूपत्ता से आय होती थी, लेकिन अब महुआ और तेंदूपत्ता ही आय का जरिया बचे है चिरोंजी बहुत कम ही प्राप्त होती है। |
Saturday, 3 February 2018
जंगलों से विलुप्त होने की कगार पर पहुंची फलदार वृक्षों की प्रजातियां
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